Politics
विकास के दावों के बीच भगवानपुर गांव की बदहाली, ग्रामीण बोले—कब बदलेगी तस्वीर?
विकास के दावों के बीच भगवानपुर गांव की बदहाली, ग्रामीण बोले—कब बदलेगी तस्वीर?सीतापुर। जनपद सीतापुर के विकासखंड कसमंडा की ग्राम पंचायत बाहरी मऊ के अंतर्गत आने वाला भगवानपुर गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद गांव की जमीनी तस्वीर अलग कहानी बयां कर रही है।ग्रामीणों के मुताबिक गांव में सड़क, जल निकासी, साफ-सफाई, पेयजल तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। उनका कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक समस्या पहुंचाने के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं हुआ।ग्रामीणों का सवाल है कि जब सरकार गांवों के विकास और मूलभूत सुविधाओं को लेकर लगातार योजनाएं चला रही है, तो भगवानपुर गांव तक इन योजनाओं का लाभ पूरी तरह क्यों नहीं पहुंच पा रहा है?ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव का स्थलीय निरीक्षण कराकर समस्याओं का चिन्हांकन कराने तथा प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्य कराने की मांग की है।प्रधान प्रतिनिधि बोले—मौसम ठीक होते ही बनेगी सड़क, ग्रामीणों का सवाल: पांच साल में विकास क्यों नहीं हुआ?सीतापुर। विकासखंड कसमंडा की ग्राम पंचायत बाहरी मऊ के भगवानपुर गांव में खराब सड़क को लेकर ग्रामीणों की परेशानी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की सड़क लंबे समय से बदहाल है, जिससे आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।इस संबंध में ग्राम पंचायत प्रधान प्रतिनिधि ने बताया कि सड़क खराब है और मौसम ठीक होते ही सड़क का निर्माण कराया जाएगा।हालांकि, प्रधान प्रतिनिधि के इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि यदि सड़क की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी, तो पांच वर्ष के कार्यकाल में अब तक इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं कराया गया?ग्रामीणों का सवाल है कि ग्राम पंचायत में विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने और उन्हें समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी किसकी है? यदि सड़क निर्माण किसी तकनीकी, बजट या प्रशासनिक कारण से रुका था, तो इसकी जानकारी ग्रामीणों को समय रहते क्यों नहीं दी गई?सबसे बड़ा सवाल—जिम्मेदार कौन?पांच वर्ष का कार्यकाल बीतने के बाद भी गांव की सड़क बदहाल है तो इसके लिए ग्राम पंचायत, संबंधित विकासखंड और अन्य संबंधित विभागों की भूमिका क्या रही, यह जांच का विषय है।अब देखना होगा कि मौसम ठीक होने के बाद सड़क निर्माण वास्तव में कब शुरू होता है और ग्रामीणों को कब तक इस समस्या से राहत मिलती है।