इस्तीफों की खामोश गवाही और लोकतंत्र की संस्थाएँ*
*इस्तीफों की खामोश गवाही और लोकतंत्र की संस्थाएँ*
जब सवाल किसी एक अधिकारी का नहीं, संस्था की आत्मनिर्भरता का हो, लोकतन्त्र की संरक्षा और जनता के अटूट विश्वास का हो।
लोकतंत्र केवल चुनाव कराने का नाम नहीं है। लोकतंत्र की असली शक्ति उन संस्थाओं में होती है जो सत्ता से प्रश्न पूछने, सत्ता को सीमित करने और कानून को सत्ता से ऊपर रखने का साहस रखती हैं। सत्ता के समक्ष बग़ैर रीढ़ की हड्डी जैसे साष्टांग मुद्रा में सज्ज रहना संस्था का अनादर है। संस्था ने जिन्हें असीमित शक्तियां दी है और उनके व्यक्ति
25 Sep 2026, 10:16
Uttar Pradesh / Lucknow