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लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के पतन का जिम्मेदार कौन? मीडिया की गिरती साख पर वरिष्ठ पत्रकार राजेश कुमार सिद्धार्थ ने उठाए सवाल “मीडिया की विश्वसनीयता बचाने के लिए वैधानिक नियमों का कड़ाई से पालन जरूरी” बहराइच। वरिष्ठ पत्रकार एवं अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद के

ब्यूरोचीफ
  1. लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के पतन का जिम्मेदार कौन?
मीडिया की गिरती साख पर वरिष्ठ पत्रकार राजेश कुमार सिद्धार्थ ने उठाए सवाल
“मीडिया की विश्वसनीयता बचाने के लिए वैधानिक नियमों का कड़ाई से पालन जरूरी”
बहराइच। वरिष्ठ पत्रकार एवं अंतरराष्ट्रीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने बहराइच में आयोजित प्रेस वार्ता में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की विश्वसनीयता और जनता के बीच उसकी साख लगातार चुनौती का सामना कर रही है। ऐसे समय में मीडिया संस्थानों और पत्रकारों को अपनी जिम्मेदारियों पर आत्ममंथन करने की आवश्यकता है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य जनता की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाना और सत्ता से जवाबदेही सुनिश्चित करना है। एक समय था जब पत्रकार के पहुंचने मात्र से अधिकारी और कर्मचारी गंभीर हो जाते थे। उन्हें पता रहता था कि जनसमस्या या विभागीय अनियमितता सामने आने पर पत्रकार उसे प्रमुखता से प्रकाशित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में मीडिया के एक हिस्से पर आर्थिक, राजनीतिक और अन्य प्रभावों के कारण पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों से समझौते के आरोप लगते रहे हैं। इससे मीडिया की साख प्रभावित होती है और जनता का विश्वास कमजोर पड़ता है।
सोशल मीडिया और फर्जी पहचान-पत्रों पर चिंता
सिद्धार्थ ने सोशल मीडिया के तेजी से बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि आज सूचना प्रसारित करना पहले की अपेक्षा बहुत आसान हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग समाचार-पत्र, पत्रिका अथवा चैनल के नाम पर बिना आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए पहचान-पत्र वितरित कर रहे हैं तथा विभिन्न क्षेत्रों में संवाददाता नियुक्त कर रहे हैं।
उन्होंने शासन और प्रशासन से ऐसे मामलों की जांच करने तथा लागू नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि वास्तविक पत्रकारिता और केवल सोशल मीडिया पर समाचार प्रसारित करने के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए।
“मीडिया संस्थानों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी”
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि मीडिया की विश्वसनीयता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। समाचार-पत्र, पत्रिकाओं, चैनलों और पत्रकार संगठनों को भी अपने स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को किसी व्यक्ति, संस्था अथवा राजनीतिक प्रभाव के बजाय जनहित को प्राथमिकता देनी चाहिए। पत्रकार का सबसे बड़ा परिचय उसका निष्पक्ष समाचार और जनता के प्रति उसकी जवाबदेही है।
नियमों के पालन की मांग
सिद्धार्थ ने सरकार से मांग की कि समाचार संस्थानों और पत्रकारिता से जुड़े वैधानिक नियमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अथवा संस्था पत्रकारिता के नाम पर कार्य कर रही है, उसकी वैधानिक स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध संबंधित कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया संस्थानों द्वारा जारी किए जाने वाले पहचान-पत्रों की व्यवस्था में पारदर्शिता होनी चाहिए, ताकि अधिकृत पत्रकारों और अनधिकृत रूप से पत्रकारिता का परिचय देने वालों के बीच अंतर स्पष्ट रहे।
“चौथा स्तंभ मजबूत होगा तभी लोकतंत्र मजबूत होगा”
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र में जनता और शासन के बीच महत्वपूर्ण सेतु है। यदि मीडिया कमजोर होता है तो आम जनता की समस्याओं की प्रभावी आवाज भी कमजोर हो सकती है।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार, अन्याय, शोषण, भेदभाव और जनसमस्याओं को सामने लाना पत्रकारिता का महत्वपूर्ण दायित्व है। इसके लिए पत्रकारों को निर्भीक, निष्पक्ष और जिम्मेदार होकर काम करना चाहिए।
उन्होंने मीडिया संस्थानों, पत्रकार संगठनों, शासन-प्रशासन और समाज के सभी वर्गों से पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सामूहिक आत्ममंथन करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत रखने के लिए मीडिया की स्वतंत्रता के साथ-साथ उसकी जवाबदेही, विश्वसनीयता और वैधानिक व्यवस्था भी मजबूत होना आवश्यक है।
प्रेस वार्ता में पत्रकारों सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।