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Crime

राज्य पुरस्कार प्राप्त प्रधानाध्यापिका पर कथित हमला, शिक्षा विभाग की कार्रवाई का इंतजार विद्यालय में अनुशासन की बात कहना पड़ा भारी

घायल प्रधानाध्यापिका
राज्य पुरस्कार प्राप्त प्रधानाध्यापिका पर कथित हमला, शिक्षा विभाग की कार्रवाई का इंतजारविद्यालय में अनुशासन की बात कहना पड़ा भारी? चार सहायक अध्यापिकाओं पर मारपीट का आरोप, चोटों के बाद कराया गया चिकित्सकीय परीक्षणमहमूदाबाद के पैगंबरपुर प्राथमिक विद्यालय का मामला | बीएसए बोले—घटना संज्ञान में है, जांच के बाद होगी कार्रवाई | खंड शिक्षा अधिकारी ने सोमवार को जांच का दिया था आश्वासन, लेकिन कार्रवाई का अब भी इंतजारमहमूदाबाद/सीतापुर।जिस विद्यालय में बच्चों को अनुशासन, संस्कार और शिक्षा का पाठ पढ़ाया जाता है, उसी विद्यालय में प्रधानाध्यापिका के साथ कथित मारपीट की घटना ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला महमूदाबाद विकासखंड क्षेत्र के पैगंबरपुर प्राथमिक विद्यालय का है, जहां राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित प्रधानाध्यापिका श्रीमती किस्मत द्विवेदी के साथ विद्यालय की कुछ सहायक अध्यापिकाओं द्वारा कथित रूप से मारपीट किए जाने का आरोप सामने आया है। घटना में प्रधानाध्यापिका के हाथ सहित शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आने की बात कही गई है।बताया गया कि विद्यालय में मध्यावकाश समाप्त होने के बाद भी कुछ सहायक अध्यापिकाएं एक स्थान पर बैठकर बातचीत कर रही थीं। प्रधानाध्यापिका ने शिक्षण कार्य प्रभावित होने की बात कहते हुए उनसे अपनी-अपनी कक्षाओं में जाकर बच्चों को पढ़ाने का अनुरोध किया। आरोप है कि इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया और कहासुनी के बाद प्रधानाध्यापिका के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई।घटना के बाद विद्यालय का माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रधानाध्यापिका के शरीर पर चोटों के निशान बताए गए हैं और उनका चिकित्सकीय परीक्षण भी कराया गया। मामले को लेकर संबंधित अध्यापिकाओं के खिलाफ शिकायत किए जाने की बात सामने आई है।‘अब तक न्याय’ ने अधिकारियों से पूछा—कब होगी कार्रवाई?घटना को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय हिंदी दैनिक ‘अब तक न्याय’ के संवाददाता ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, सीतापुर से पूरे मामले को लेकर बातचीत की।जब संवाददाता ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से पूछा कि प्रधानाध्यापिका के साथ विद्यालय में कथित मारपीट की घटना सामने आई है, इस पर विभाग क्या कार्रवाई कर रहा है, तो जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कहा कि घटना उनके संज्ञान में आई है। मामले की जांच कराई जाएगी और जांच के बाद संबंधित अध्यापकों/अध्यापिकाओं के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।इसके बाद ‘अब तक न्याय’ के संवाददाता ने खंड शिक्षा अधिकारी महमूदाबाद से भी मामले की जानकारी ली। संवाददाता द्वारा घटना के संबंध में सवाल किए जाने पर खंड शिक्षा अधिकारी ने भी मामला संज्ञान में आने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि सोमवार को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।लेकिन सवाल यह है कि जांच और कार्रवाई के आश्वासन के बाद अब तक क्या हुआ? समाचार लिखे जाने तक किसी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।प्रधानाध्यापिका की पीड़ा ने खड़े किए कई सवालविद्यालय में प्रधानाध्यापिका की जिम्मेदारी केवल प्रशासनिक कार्य तक सीमित नहीं होती, बल्कि विद्यालय में शैक्षणिक अनुशासन और बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था बनाए रखना भी उनके दायित्व का हिस्सा है। यदि किसी प्रधानाध्यापिका द्वारा शिक्षिकाओं को कक्षा में जाकर बच्चों को पढ़ाने के लिए कहा गया और इसी बात को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि मारपीट की स्थिति पैदा हो गई, तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंतन का विषय है।आखिर विद्यालय में बच्चों के सामने शिक्षक आपस में इस तरह क्यों उलझे?क्या विद्यालय में अनुशासन बनाए रखने की कोशिश का परिणाम विवाद और कथित मारपीट के रूप में सामने आना चाहिए?यदि आरोप सही हैं तो जिम्मेदार लोगों पर विभाग कब कार्रवाई करेगा?इन सवालों का जवाब अब विभागीय जांच से ही सामने आएगा।शिक्षक समुदाय में भी चर्चा, निष्पक्ष जांच की मांगघटना की जानकारी सामने आने के बाद शिक्षक समुदाय में भी चर्चा है। मामले में एक पक्ष द्वारा मारपीट का आरोप लगाया गया है, जबकि आरोपित शिक्षिकाओं का पक्ष और उनका विस्तृत बयान भी जांच के दौरान सामने आना आवश्यक है। इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोपों में तथ्य नहीं पाए जाते हैं तो वास्तविक स्थिति भी सार्वजनिक होनी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष के साथ अन्याय न हो।आश्वासन से आगे बढ़ेगा मामला या फिर फाइलों में दब जाएगा?सबसे बड़ा सवाल यही है कि अधिकारियों के संज्ञान में आने और जांच का आश्वासन दिए जाने के बाद कार्रवाई कब होगी। एक ओर प्रधानाध्यापिका के साथ कथित मारपीट की शिकायत है, दूसरी ओर विभागीय अधिकारी जांच का भरोसा दे रहे हैं। ऐसे में अब निगाहें शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।‘अब तक न्याय’ का सवाल स्पष्ट है—यदि विद्यालय में शिक्षकों की आपसी खींचतान बच्चों की शिक्षा और विद्यालय के अनुशासन को प्रभावित करने लगे, तो इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?मामले में विभागीय जांच के निष्कर्ष और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई से ही यह स्पष्ट होगा कि घटना की वास्तविकता क्या थी और जिम्मेदारी किसकी बनती है।अब तक न्याय की पड़ताल जारी