25 Oct 2026, Sunday | AB TAK NYAY – भारत का प्रमुख हिंदी दैनिक समाचार पत्र
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सामाजिक न्याय और वैज्ञानिक चेतना के संवाहक थे ‘एशिया के सुकरात’ पेरियार: नरेंद्र सिंह वर्मा

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महमूदाबाद। सामाजिक विषमता, पाखंड, ढोंग और रूढ़िवादी आडंबरों पर कड़ा प्रहार करने वाले महान विचारक, समाज सुधारक तथा यूनेस्को द्वारा ‘एशिया के सुकरात’ की उपाधि से विभूषित पेरियार ई. वी. रामास्वामी नायकर की जयंती एशिया कॉलोनी में धूमधाम और गरिमामय वातावरण में मनाई गई। शिक्षक एवं समाजसेवी आलोक वर्मा आजाद के निज आवास पर आयोजित इस विचार गोष्ठी में राजनीति, शिक्षा, साहित्य, पत्रकारिता और विधि क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया और पेरियार के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री नरेंद्र सिंह वर्मा ने कहा कि पेरियार केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक गैर-बराबरी के खिलाफ उठी एक प्रचंड वैचारिक क्रांति का नाम हैं। उन्होंने जीवन पर्यंत जातिवाद, अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों को समाप्त कर वैज्ञानिक सोच व तार्किक चेतना को बढ़ावा देने का कार्य किया। वर्तमान दौर में सामाजिक समरसता और समतामूलक समाज के निर्माण के लिए उनके विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं।आयोजक शिक्षक एवं समाजसेवी आलोक वर्मा 'आजाद' ने कहा कि पेरियार ने मानव गरिमा और आत्मसम्मान को सर्वोपरि रखा। जब तक समाज में मानसिक गुलामी और कुरीतियों का अंत नहीं होगा, तब तक वास्तविक स्वतंत्रता अधूरी है। बार अध्यक्ष सुरेंद्र पटेल, डॉ. अशोक वर्मा और डॉ. अखिलेश वर्मा ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पेरियार ने वंचितों, शोषितों और महिलाओं के अधिकारों के लिए जो संघर्ष किया, वह भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। पत्रकार अनुज कुमार जैन और सुधीर वर्मा ने कहा कि पेरियार का तर्कवाद आज की युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक है।समारोह में प्रमुख रूप से पॉलिटेक्निक के पूर्व प्रवक्ता अशोक कुमार पटेल, एडवोकेट सुदीप कुमार वर्मा, आदित्य वर्मा, विजय वर्मा (खपूरा), शिक्षक गोपाल कृष्ण, राम सजीवन वर्मा, शिक्षक उमेश वर्मा, कवि तुषार मौर्य, पीयूष वर्मा, अतुल कुशवाहा, अखिलेश वर्मा एडवोकेट, निरंकार वर्मा, राजाराम गौतम, अवधराम मौर्य, रामनरेश कुशवाहा, सुनील कुमार, संतोष कन्नौजिया, हरेराम, शिक्षक हिमांशु वर्मा, पंकज यादव, अनिरुद्ध वर्मा, अरविंद कुमार एडवोकेट, मोईन मंसूर, संतोष कुमार, अमायन सिंह भारती, राजदेव भारती, रामसजीवन, सियाराम गौतम, प्रीति वर्मा, सरिता वर्मा, रुचि वर्मा, राजेंद्र भास्कर, नैपाल सिंह, प्रमोद कुमार, विश्वनाथ भारती, पप्पू वर्मा, सुनील राजवंशी, नरेंद्र हिंदुस्तानी, अनूप कुमार, शिक्षक ओम प्रकाश वर्मा तथा डॉ. रामसागर वर्मा सहित भारी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित रहे और अपने विचार व्यक्त किए। गोष्ठी का समापन सामाजिक एकता और बंधुत्व के संकल्प के साथ हुआ।